उल्हासनगर | प्रतिनिधि
महावितरण के स्मार्ट मीटर अभियान को लेकर अब उल्हासनगर में बड़े सवाल उठने लगे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उल्हासनगर के कई क्षेत्रों में स्मार्ट मीटर लगाने की रफ्तार कल्याण, डोंबिवली और अंबरनाथ के कई हिस्सों की तुलना में अधिक दिखाई देती है। ऐसे में नागरिक सवाल कर रहे हैं कि क्या महावितरण ने स्मार्ट मीटर लगाने के लिए केवल उल्हासनगर को ही टार्गेट बनाया है?
दूसरी ओर, ठाणे में स्मार्ट मीटर के बाद बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए भाजपा विधायक संजय केळकर की मौजूदगी में हुई बैठक के बाद महावितरण ने बड़ा फैसला लिया। अब ठाणे में 20 से 25 प्रतिशत उपभोक्ताओं के यहां पुराने मीटर के साथ "चेक मीटर" लगाकर 2 से 3 महीने तक दोनों मीटरों की रीडिंग की तुलना की जाएगी, ताकि बिलिंग की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
महावितरण की रिपोर्ट कॉपी इसमे साफ दिख रहा है उल्हासनगर ही टार्गेट था और है...👇
युवासेना कल्याण लोकसभा सचिव हरजिंदरसिंह (विक्की) भुल्लर ने सवाल उठाया कि यदि ठाणे के नागरिकों के लिए चेक मीटर लगाया जा सकता है, तो उल्हासनगर के लोगों को यह सुविधा क्यों नहीं दी गई? क्या उल्हासनगर के नागरिक दूसरे दर्जे के हैं?
भुल्लर ने आरोप लगाया कि शहर में बड़ी संख्या में उपभोक्ता बढ़े हुए बिजली बिलों की शिकायत कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि कई स्थानों पर आज भी पुराने मीटर लगे हुए हैं, लेकिन रिकॉर्ड में स्मार्ट मीटर दिखाकर बिल भेजे जा रहे हैं। उन्होंने इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि महावितरण पहले अपनी कार्यप्रणाली सुधारे, उसके बाद स्मार्ट मीटर लगाए। ठाणे की तरह उल्हासनगर में भी पहले प्रत्येक इमारत या कम से कम 20 से 25 प्रतिशत उपभोक्ताओं के यहां तीन महीने के लिए चेक मीटर लगाया जाए, दोनों मीटरों की रीडिंग की तुलना की जाए और उसके बाद ही स्मार्ट मीटर की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाए।
भुल्लर ने यह भी सवाल उठाया कि यदि ठाणे के विधायक की मांग पर महावितरण ने तुरंत निर्णय लिया, तो क्या उल्हासनगर के नागरिकों के लिए भी स्थानीय विधायक ऐसा ही ठोस कदम उठाएंगे? क्या वे महावितरण के अधिकारियों के सामने ठाणे की तर्ज पर चेक मीटर और पारदर्शी जांच की मांग करेंगे?
युवासेना कल्याण लोकसभा सचिव हरजिंदरसिंह (विक्की) भुल्लर ने स्थानीय विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि, "आपने बिजली बिलों को लेकर ग्राहक शिविर लगाया, यह निश्चित रूप से सराहनीय कदम था। लेकिन उस शिविर में पहुंचे अधिकांश उपभोक्ताओं को महावितरण के अधिकारियों ने केवल टालमटोल वाले जवाब दिए। आज तक एक भी उपभोक्ता का बिजली बिल कम नहीं हुआ। लगभग सभी को यही कहा गया कि उनका बिल सही है।"
भुल्लर ने आगे आरोप लगाया कि, "आप जनता के जनप्रतिनिधि हैं। यदि यह मुद्दा विधानसभा के अधिवेशन में मजबूती से उठाया जाता, तो शायद उल्हासनगर के हजारों उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती थी। ठाणे में जनप्रतिनिधियों की पहल के बाद महावितरण ने 20 से 25 प्रतिशत उपभोक्ताओं के यहां चेक मीटर लगाने का फैसला लिया, लेकिन उल्हासनगर के लिए आज तक ऐसा कोई निर्णय नहीं हुआ। आखिर उल्हासनगर की जनता के साथ अलग व्यवहार क्यों किया जा रहा है?"
उन्होंने कहा कि, "हमारी मांग है कि ठाणे की तर्ज पर उल्हासनगर में भी पहले चेक मीटर लगाए जाएं, दो से तीन महीने तक दोनों मीटरों की रीडिंग की तुलना की जाए और उसके बाद ही स्मार्ट मीटर लगाए जाएं। गरीब और मध्यमवर्गीय जनता बढ़े हुए बिजली बिलों से परेशान है। अब समय आ गया है कि जनप्रतिनिधि खुलकर जनता के हित में लड़ाई लड़ें और महावितरण से जवाब मांगें।"
अब उल्हासनगर की जनता का एक ही सवाल है—
"कल्याण, डोंबिवली, अंबरनाथ और ठाणे के लिए अलग व्यवस्था, लेकिन उल्हासनगर के साथ अलग व्यवहार क्यों? क्या महावितरण ने स्मार्ट मीटर अभियान में उल्हासनगर को ही अपना सबसे बड़ा टार्गेट बना लिया है?"
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