उल्हासनगर के राजीव गांधी नगर क्षेत्र में नालेसफाई के दौरान सामने आए कथित गंभीर मामले ने पूरे शहर में चिंता का माहौल बना दिया है। सोशल मीडिया, स्थानीय नागरिकों और अनेक पत्रकारों द्वारा इस विषय को प्रमुखता से उठाए जाने के बावजूद अब तक दोषियों पर किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है।
आरोप है कि नालेसफाई के दौरान नाबालिग बच्चों को जेसीबी (पोकलेन) मशीन के बकेट में बैठाकर जोखिम भरे तरीके से ले जाया गया, जिससे उनकी जान खतरे में पड़ सकती थी। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सुरक्षा नियमों और बाल संरक्षण से जुड़े गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
युवासेना कल्याण जिला सचिव हरजिंदर सिंह भुल्लर (विक्की भुल्लर) ने पुलिस निरीक्षक श्री आव्हाड से मुलाकात कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, उन्होंने प्रशासन को घटना का वीडियो साक्ष्य उपलब्ध कराने की भी बात कही है।
उल्हासनगर महानगरपालिका आयुक्त को भी इस संबंध में लिखित शिकायत सौंपी गई है। इसके बावजूद अब तक कार्रवाई न होने से नागरिकों में सवाल उठ रहे हैं।
जनता के सवाल
👉 इतने गंभीर मामले के बाद भी कार्रवाई में देरी क्यों?
👉 यदि कंपनी पर पहले भी सवाल उठे थे, तो उसे नालेसफाई का ठेका किस आधार पर दिया गया?
👉 बच्चों की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार अधिकारी कौन हैं?
👉 क्या ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी?
👉 क्या इस पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी?
उठ रहे हैं कई सवाल कई पत्रकारों और सामाजिक संगठनों द्वारा इस विषय को लगातार उठाने के बावजूद कार्रवाई में देरी होने से लोगों के बीच यह चर्चा है कि क्या प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले रहा है? नागरिकों का कहना है कि यदि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े ऐसे मामलों में भी त्वरित कार्रवाई नहीं होती, तो इससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
युवासेना ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल एवं सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
"उल्हासनगर की जनता का एक ही सवाल है — आखिर कार्रवाई कब होगी?"
0 Comments