8 टर्म का रिकॉर्ड, आनंद दिघे की विरासत: उल्हासनगर में शिवसेना का सबसे मजबूत महापौर चेहरा – भुल्लर महाराज
उल्हासनगर | राजनीतिक समाचार
उल्हासनगर महानगरपालिका में इस बार शिवसेना महापौर पद पर अपना नेतृत्व स्थापित करने की पूरी तैयारी में है। ऐसे में महापौर पद को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज़ हैं और राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज) का नाम सबसे प्रबल दावेदार के रूप में उभरकर सामने आ रहा है।
सबसे बड़ी और निर्णायक बात यह है कि भुल्लर महाराज अब तक 8 बार नगरसेवक निर्वाचित हो चुके हैं, जो उल्हासनगर महानगरपालिका के इतिहास में एक रिकॉर्ड है। वर्तमान में वे सबसे अधिक टर्म वाले नगरसेवक हैं, जिससे उनकी वरिष्ठता और जनता के भरोसे का साफ़ संकेत मिलता है।
राजनीतिक दृष्टि से भुल्लर महाराज का कद और भी बड़ा इसलिए माना जाता है क्योंकि वे शिवसेना के फायरब्रांड नेता स्व. आनंद दिघे साहेब के सबसे नजदीकी और विश्वासपात्र सहयोगियों में शामिल रहे हैं। आनंद दिघे साहेब उन्हें अपना चेहेता शिवसैनिक मानते थे। उन्हीं के विचारों, अनुशासन और आक्रामक जनसेवा की परंपरा को भुल्लर महाराज आज भी पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
शिवसेना संगठन में भुल्लर महाराज ने केवल पद नहीं संभाले, बल्कि जिम्मेदारियां निभाईं। पार्टी ने उन्हें स्थायी समिति सभापति, विरोधी पक्ष नेता और सभागृह नेता जैसे महत्वपूर्ण पद सौंपे, जो उनके अनुभव और संगठनात्मक क्षमता को दर्शाते हैं। वर्तमान समय में शिवसेना की ओर से वे सबसे वरिष्ठ नगरसेवक माने जाते हैं।
महापौर पद की दौड़ में अरुण आशान और राजेंद्र चौधरी के नाम भी सामने हैं, लेकिन दोनों ही नेताओं के परिवार से पहले ही महापौर पद का प्रतिनिधित्व हो चुका है। अरुण आशान की माताश्री दो बार महापौर रह चुकी हैं, वहीं राजेंद्र चौधरी की धर्मपत्नी भी महापौर रह चुकी हैं। ऐसे में वरिष्ठता, अनुभव और न्याय की दृष्टि से देखा जाए तो भुल्लर महाराज ही ऐसे नेता हैं जिन्हें अब तक महापौर बनने का अवसर नहीं मिला।
एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि जब शिवसेना में शिंदे गुट का गठन हुआ, तब राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज) सबसे पहले उपमुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे साहेब के साथ खड़े हुए और बिना किसी दबाव के पार्टी से जुड़े। जबकि कई अन्य नेता बाद में परिस्थितियों के चलते पार्टी में आए। यही कारण है कि पार्टी के भीतर उन्हें एक निष्ठावान और भरोसेमंद नेता माना जाता है।
भुल्लर महाराज की धर्मपत्नी भी तीन टर्म की नगरसेविका रह चुकी हैं, जिससे भुल्लर परिवार का नगरसेवा का मजबूत और निरंतर इतिहास सामने आता है। इसी कारण सामाजिक संस्थाओं और शिवसेना के कई स्थानीय पदाधिकारियों की मांग है कि इस बार भुल्लर परिवार को महापौर पद का अवसर दिया जाना चाहिए।
स्थानीय शिवसेना पदाधिकारियों का कहना है कि सांसद डॉ. श्रीकांत शिंदे और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे साहेब कभी भी पुराने, निष्ठावान और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय नहीं करते। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यदि लॉटरी में महापौर पद जनरल पुरुष या महिला के लिए आरक्षित होता है, तो क्या शिवसेना नेतृत्व अपने सबसे वरिष्ठ, 8 बार निर्वाचित नगरसेवक और आनंद दिघे साहेब की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले राजेंद्रसिंह भुल्लर (महाराज) को न्याय देता है या नहीं।
उल्हासनगर की राजनीति में यह फैसला आने वाले दिनों में ऐतिहासिक साबित हो सकता है।
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